किशनगंज जिले के कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में 2 नवंबर को रबी सीजन में मक्का की खेती करने वाले किसानों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य किसानों को फॉल आर्मीवार्म (FAW) कीट के प्रभावी नियंत्रण और उन्नत वैज्ञानिक पद्धतियों से अवगत कराना था, ताकि रबी मक्का में उत्पादन और गुणवत्ता को सुरक्षित रखा जा सके। कार्यशाला में जिले भर से लगभग 150 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कीट विज्ञानी डॉ. राकेश कुमार ने फॉल आर्मीवार्म की पहचान, जीवन चक्र और फसल पर इसके प्रकोप के लक्षणों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कीट मक्का की पत्तियों, तने और भुट्टे को गंभीर नुकसान पहुंचाता है, और यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो 30-50 प्रतिशत तक उपज का नुकसान हो सकता है। उन्होंने एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) के तहत जैविक और रासायनिक उपायों का संतुलित उपयोग सुझाया।
कार्यशाला में किसानों को नीम आधारित कीटनाशकों, फेरोमोन ट्रैप, और अनुशंसित रासायनिक कीटनाशकों के सही छिड़काव विधि का प्रदर्शन किया गया। साथ ही, मक्का की उन्नत किस्मों, बीज उपचार, और संतुलित उर्वरक प्रबंधन पर भी चर्चा हुई। केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मौसम आधारित सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण के बारे में भी जागरूक किया।
किसानों ने कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी दिखाते हुए अपनी फसलों में आ रही समस्याओं के बारे में प्रश्न पूछे। विशेषज्ञों ने मौके पर ही निदान बताए और किसानों को कीट निगरानी के लिए ‘स्काउटिंग’ की आदत डालने की सलाह दी। कई किसानों ने बताया कि पिछले वर्ष फॉल आर्मीवार्म से उनकी फसल प्रभावित हुई थी, और इस प्रशिक्षण से उन्हें अब अधिक आत्मविश्वास महसूस हो रहा है।
कार्यशाला के समापन पर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख ने किसानों को प्रमाण पत्र और प्रशिक्षण सामग्री वितरित की। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में गांव-गांव जाकर फॉल आर्मीवार्म जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। किसानों से अपील की गई कि वे कीट के लक्षण दिखने पर तुरंत केंद्र से संपर्क करें, ताकि समय रहते नियंत्रण किया जा सके और रबी मक्का की फसल सुरक्षित रहे।